स्वर्ण जयंती शहरी एवं ग्रामीण रोजगार योजना। Sahari and Gramin Rojgar Yojana

गवर्नमेंट सरकारी योजना वेबसाइट में आपका स्वागत है। इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपके साथ सांझा करने वाले हैं स्वर्ण जयंती शहरी एवं ग्रामीण रोजगार योजना (Swarn Jayanti Shahari and Gramin Rojgar Yojna) , यह योजना क्या है, कैसे सरकार द्वारा संचालित की जाती है, इसका मुख्य उद्देश्य क्या है? आदि तमाम बिंदुओं पर चर्चा करने वाले हैं। आर्टिकल को पूरा पढ़ें यह Shahari and Gramin Rojgar Yojna से रिलेटेड पोस्ट है तो चलिए जानते हैं विस्तार से,

Sahari and Gramin Rojgar Yojana
Sahari and Gramin Rojgar Yojana

भारत की स्वतंत्रता की स्वर्ण जयन्ती (1997) के अवसर पर देश के शहरी एवं ग्रामीण बेरोजगारों को रोजगार प्रदान करने के लिये दो योजनाएँ लागू की गई। इनका विवरण निम्न प्रकार हैं

1-स्वर्ण जयन्ती शहरी रोजगार योजना (SJSRY)

स्वतंत्रता के स्वर्ण जयन्ती वर्ष में केन्द्र सरकार ने शहरी क्षेत्रों में निर्धनता निवारण की एक नई योजना प्रारम्भ की है। स्वर्ण जयन्ती शहरी रोजगार योजना (Sahari and Gramin Rojgar Yojana) नाम से प्रारम्भ की गई यह योजना 1-12-1997 से लागू की गई है। इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में पहले से कार्यान्वित की जा रही तीन योजनाओं-नेहरु रोजगार योजना (NRY) , निर्धनों के लिए शहरी बुनियादी सेवाएँ तथा प्रधानमंत्री को समन्वित शहरी गरीबी उन्मूलन योजना को इसी नई योजना में शामिल कर दिया गया है। इन योजनाओं के तहत् चल रहे कार्यों को 30 नवम्बर, 1997 तक पूरा कर लेने का निर्देश सभी राज्यों को दे दिया गया था। इस योजना की प्रमुख बातें निम्न प्रकार से हैं-

Sahari and Gramin Rojgar Yojana

  1. योजना के उद्देश्य-नई प्रारम्भ की गई स्वर्ण जयन्ती शहरी रोजगार योजना Rojgar Yojna का उद्देश्य शहरी निर्धनों को स्वरोजगार उपक्रम स्थापित करने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करना तथा सवेतन रोजगार सर्जन हेतु उत्पादक सम्पत्तियों का निर्माण करना है।
  2. Yojna की वित्त व्यवस्था-स्वर्ण जयन्ती शहरी रोजगार योजना के लिए धन की व्यवस्था केन्द्र राज्यों के मध्य 75: 25 के अनुपात में की गई है।
  3. योजना की स्कीमें

इस योजना की दो विशेष स्कीमें हैं

1-शहरी स्वरोजगार कार्यक्रम (Shahari Rojgar Yojna)

इस योजना के तीन अलग-अलग भाग हैं

  1. प्रत्येक शहरी गरीब लाभार्थी को लाभप्रद स्वरोजगार उद्यम लगाने के लिए सहायता।
  2. शहरी गरीब महिलाओं के समूह को लाभप्रद स्वरोजगार उद्यम लगाने के लिए सहायता देना। इस उपयोजना को शहरी क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चों को विकास योजना कहा जा सकता है।
  3. लाभार्थियों, सम्भावित लाभार्थियों और शहरी रोजगार कार्यक्रम से सम्बद्ध अन्य व्यक्तियों को व्यावसायिक (Vocational) और उद्यम मूल्क कौशल के उन्नयन के लिए प्रशिक्षण देना।

यह कार्यक्रम भारत के सभी शहरी नगरों पर लागू होगा तथा इसे शहरी गरीब समूहों पर विशेष ध्यान देते हुए समग्र नगर आधार पर कार्यान्वित किया जाएगा।

2-शहरी मजदूरी रोजगार कार्यक्रम (Shahari majdur yojna)

इस कार्यक्रम का उद्देश्य शहरी स्थानीय निकायों के अधिकार क्षेत्र में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लाभार्थियों को, उनके श्रम का सामाजिक और आर्थिक रूप से उपयोगी सार्वजनिक सम्पत्ति के निर्माण में उपयोग करके मजदूरी रोजगार उपलब्ध कराना है।

यह कार्यक्रम 1991 की जनगणना के अनुसार 5 लाख से कम आबादी वाले शहरी स्थानीय निकायों पर लागू किया गया है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत कार्यों के लिए सामग्री-श्रम अनुपात 60: 40 रखा गया है। इस कार्यक्रम का सर्वेक्षण सामुदायिक विकास समितियाँ करती हैं। ये समितियाँ अपने क्षेत्रों में उपलब्ध बुनियादी न्यूनतम सुविधाओं की सूची तैयार करती है।

2-स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना (SJGSY)

स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना (Gramin Rojgar Yojna) गाँवों में रहने वाले गरीबों के लिए स्व-रोजगार की एक अकेली योजना 1 अप्रैल, 1999 को प्रारम्भ की गई। इस योजना में पूर्व से चल रही निम्नांकित 6 योजनाओं का विलय किया गया है

(A) समन्वित ग्राम विकास कार्यक्रम (IRDP) ,
(B) स्वरोजगार के लिए ग्रामीण युवाओं का प्रशिक्षण कार्यक्रम (Trysem) ,
(C) ग्रामीण क्षेत्र में महिला एवं बाल विकास कार्यक्रम,
(D) ग्रामीण दस्तकारों को उन्नत औजारों की किट की आपूर्ति का कार्यक्रम,
(E) गंगा कल्याण योजना (Gky) तथा
(F) दस लाख कुआँ योजना (Mws) ।

अब उपर्युक्त कार्यक्रम अलग से नहीं चल रहे हैं। इस योजना से पहले के स्वरोजगार कार्यक्रमों की शक्तियों और कमजोरियों को ध्यान में रखकर सुधार किया गया है।

इस योजना के विशिष्ट बिन्दु निम्नलिखित हैं-

  1. उद्देश्य:-इस योजना का उद्देश्य सहायता प्राप्त प्रत्येक परिवार को 3 वर्ष की अवधि में गरीबी रेखा से ऊपर उठाना है। कम से कम 50% अनु। जाति / जनजाति, 40% महिलाओं तथा 3% विकलांगों को योजना का लक्ष्य बनाया गया है। आगामी 5 वर्षों में प्रत्येक विकास खण्ड में रहने वाले गीण गरीबों में से 30% को इस योजना के क्षेत्र में लाने का प्रस्ताव है।
  2. धनराशि:-योजना में दी जाने वाली धनराशि केन्द्र और राज्य सरकारें 75: 25 के अनुपात में विभाजित करेगी।
  3. घटक:-इस योजना के दो प्रमुख घटक हैं-प्रत्येक विकास खण्ड पर चार या पाँच मुख्य ऐसी गतिविधियों का चयन पंचायत समितियों द्वारा करने का प्रावधान है जो स्थानीय संसाधन, शिल्प और विपणन उपलब्धता के अनुरुप हो, ताकि स्वरोजगारी अपने विनियोगी से लाभकारी आय प्राप्त कर सकें। ऐसी मुख्य गतिविधियाँ एक ‘Cluster’ रूप में समन्वित की जाएँगी, ताकि पूर्वगामी एवं अग्रिम क्रियाओं के बीच एक उचित समन्वय किया जा सके।
  4. स्वरुप:-यह योजना एक ऋण एवं अनुदान योजना है, जिसमें ऋण एक प्रमुख तथ्य है। जबकि अनुदान केवल एक समर्थनकारी तत्व है। सब्सिडी परियोजना लागत के 30% की एक समान दर पर होगी, किन्तु इसकी अधिकतम सीमा 7500₹ होगी।

अनुसूचित जाति / जनजाति के लिए यह सीमा 50% या 10, 000 ₹ होगी। आत्मनिर्भर समूहों के लिए अनुदान परियोजना लागत का 50%, लेकिन अधिकतम 1.25 लाख ₹ होगा। सिंचाई परियोजनाओं के लिए अनुदान की कोई वित्तीय सीमा नहीं है।

  1. प्रगति:-इस कार्यक्रम के अन्तर्गत शुरु (1999) से अन्त (2010) तक 20 लाख स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है, जिसमें 50 लाख स्वरोजगारी शामिल हैं। इन्हें अब तक कुल लगभग 15, 000 करोड़ ₹ की सहायता दी गई है। इन कुल स्वरोजगारियों में 46% अनुसूचित जाति / जनजाति से और 53% महिलाएँ हैं।

समूह गतिविधियाँ

योजना समूह दृष्टिकोण को वरीयता देती है। योजना का दृष्टिकोण इस विश्वास पर आधारित है कि ग्रामीणों में उत्कृष्ट शक्तियाँ हैं, गरीबी उन्मूलन की दिशा में गरीब स्वयं निर्णय लें, यह सिद्ध माना गया है कि ऐसे समूह जिनके संगठन किफायती एवं ऋण के आधार पर रहे हैं, उन्हें ऋण प्राप्त करने में एवं स्वरोजगार योजना का लाभ प्राप्त करने में अधिक सफलता मिली है। स्व-सहायता समूह अपने विकास हेतु तीन प्रमुख चरणों से गुजरेगा।

  1. समूह का गठन, संगठन का विकास एवं सशक्तिकरण।
  2. मूलधन एवं परिसम्पत्तिक का निर्माण, रिवॉल्विग फण्ड की उपलब्धता, कौशल उन्नयन।
  3. आय वृद्धि हेतु उपयुक्त आर्थिक गतिविधियों का चयन।

स्व-सहायता समूह का गठन

यह वह समूह है, जिसने स्वेच्छा से संगाठत होकर अपने सदस्यों की गरीबी का उन्मूलन करने का संकल्प लिया है तथा वे नियमित बचत कर एक कॉमन फण्ड बनाएंगे। समूह संगठन के लिये निम्न मार्गदर्शी बिन्दुओं को ध्यान में रखा जाएगा।

  1. समूह सामान्यत 10 से 20 व्यक्तियों के होंगे। केवल लघु सिंचाई योजना हेतु व विकलांग व्यक्तियों के समूह हेतु न्यूनतम संख्या 5 हो सकेगी।
  2. सभी सदस्य, गरीबी रेखा के नीचे वाले व्यक्ति ही रहेंगे, समूह अपने आचरण एवं प्रबंधन के नियम स्वयं बनाएगा।
  3. कॉमन फण्ड से सदस्यों को ऋण दिया जा सकेगा जिसकी सम्पूर्ण प्रक्रिया समूह द्वारा निर्धारित की जायेगी।
  4. बैंकों से सम्बन्ध जोड़ना-समूह द्वारा प्रत्येक माह नियमित रूप सम्पर्क स्थापित किया जायेगा। ब्लॉव व बौंकों के अधिकारी समूह से स्वयं भेंट लेते रहेंगे तथा उन्हें जयंती ग्राभ… एस योजना व अन्य स्वरोजगार सम्बन्धी गतिविधियों के बारे में आवश्यक जानकारी देते रहेंगे।
  5. स्व-सहायता समूह की ग्रेडिंग-समूह के निर्माण की प्रक्रिया सामान्यतः छह माह की रहेगी। इसके पश्चात् समूह का परीक्षण किया जायेगा कि क्या वे विकास के अगले चरण में जाने हेतु उपयुक्त हो चुके हैं जिसका निर्धारण ग्रेडिंग प्रणाली से किया जाएगा। यह कार्य जिला ग्रामीण विकास अभिकरण द्वारा किया जायेगा।
  6. स्व सहायता समूह की क्षमता का निर्धारण प्रत्येक उस समूह का जिसने छह माह अवधि व्यतीत कर स्वयं को सक्षम एवं जीवंत सिद्ध कर दिया है, उसे जिला ग्रामीण विकास अभिकरण योजना अन्तर्गत रिवॉल्विंग फण्ड का प्रयोग समूह की राशि बढ़ाने के लिए किया जा सकेगा।
निष्कर्ष

ऊपर दिए गए आर्टिकल में आपने स्वर्ण जयंती शहरी एवं ग्रामीण रोजगार योजना Sahari and Gramin Rojgar Yojana के अंतर्गत यह महत्त्वपूर्ण जानकारी पढ़ी। आशा है आपको यह जानकारी जरूर अच्छी लगी होगी। अपने दोस्तों के साथ भी सांझा करें आर्टिकल पढ़ने के लिए धन्यवाद,

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